RBI ने एक बार फिर रेपो रेट को स्थिर रखना पसंद किया
6.5 पर स्थिर रखी जा रही है रेपो रेट की दरें
आरबीआई ने मौद्रिक नीति की समीक्षा में एक बार फिर रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। ब्याज दरों को 6.50 प्रतिशत पर स्थिर बनाए रखा है। रेपो रेट वह दर है जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से ऋण लेते हैं। रेपो रेट यथावत रखने का निर्णय महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने की रणनीति के तहत है। आरबीआई मानता है कि खाद्य मुद्रास्फीति में उतार-चढ़ाव अभी भी एक फैक्टर है, जबकि आर्थिक वृद्धि मजबूती की तरफ ही बढ़ रही है, ऐसे में ब्याज दरों को स्थिर रखना उपयुक्त होगा। गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि केंद्रीय बैंक की प्राथमिकता मूल्य स्थिरता बनाए रखना है और हमारा महंगाई को नियंत्रित करने का रुख जारी रहेगा। यदि भविष्य में मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ा तो नए सिरे से रणनीति बनाई जाएगी। रेपो रेट स्थिर रहने से आम लोगों के कर्जों पर फिलहाल कोई अतिरिक्त बोझ नहीं आएगा। हालांकि बैंक अपने स्तर पर ब्याज दरों में मामूली बदलाव कर सकते हैं। उद्योग जगत ने स्थिर ब्याज दरों को निवेश का माहौल बेहतर बनाने वाला बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में स्थिर रेपो रेट मददगार है लेकिन यदि खाद्य कीमतों में तेजी रही तो भविष्य में दरों में बदलाव करना ही होगा।
