Economy को लेकर विश्व बैंक ने कहा भारत सबसे तेज उन्नति करेगा
भारत की आर्थिक वृद्धि पर विश्व बैंक का नया आकलन
भारतीय अर्थव्यवस्था पर विश्व बैंक ने नए आकलन में आने वाले वर्षों के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं। वैश्विक आर्थिक संभावनाएं में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रह सकती है। यह जून 2025 में लगाए गए अनुमान से 0.9 प्रतिशत अधिक है। इस संशोधित आकलन के पीछे मजबूत घरेलू मांग, कर सुधारों का असर और निवेश की गति को प्रमुख कारण माना गया है। विश्व बैंक के इस अनुमान को मानें तो यह तय है कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश रहेगा। हालांकि अमेरिका के हर दिन बदलते टैरिफ को 50 प्रतिशत मान कर ही ये अनुमान लगाए गए हैं। अमेरिका की अनिशचितता के बावजूद भारत की वृद्धि दर पर इसका बड़ा नकारात्मक असर नहीं नजर आना इस वजह से संव है कि घरेलू कारक इकानामी को सहारा दे रहे हैं। रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर कुछ धीमी होन की बात कही गई है र तब इसके लिए अनुमान 6.5 प्रतिशत तक का लगाया गया है। इसका कारण वैश्विक व्यापारिक परिस्थितियों में संभावित चुनौतियाँ और निवेश की गति में अस्थायी कमी बताया गया है लेकिन यह गतिरोध एक साल से जयादा असर नहीं कर सकेंगे और वित्त वर्ष 2027-28 में वृद्धि दर फिर से फिर 6.6 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है। इसमें निर्यात में सुधार और निवेश में तेजी से समर्थन का बड़ा रोल रहेगा. भारत की आर्थिक यात्रा पर यह अनुमान उत्साहजनक है क्योंकि घरेलू मांग और संरचनात्मक सुधारों के बल पर वैश्विक चुनौतियों के बीच भी स्थिरता रह सकती है। कर सुधारों और निवेश के लिए बेहतर माहौल ने उद्योगों और सेवाओं को नई ऊर्जा दी है। साथ ही, निर्यात में सुधार से विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार संतुलन को भी मजबूती मिलेगी। कुल मिलाकर, विश्व बैंक की यह रिपोर्ट भारत के लिए सकारात्मक संकेत देती है। यह स्पष्ट करती है कि आने वाले वर्षों में भारत न केवल एशिया बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा। घरेलू मांग, सेवा क्षेत्र की मजबूती और निवेश की निरंतरता भारत को आर्थिक स्थिरता और विकास की दिशा में आगे ले जाएगी।
