March 29, 2026
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Vikram Samvat 2081 की शुरुआत आज से

विक्रम संवत: भारतीय संस्कृति का एक अनूठा पर्व

भारतीय संस्कृति में विक्रम संवत का विशेष महत्व है. यह नव वर्ष का प्रतीक है, जो नई उम्मीदों और आशाओं को जन्म देता है. विक्रम संवत का आरंभ चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होता है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार अप्रैल माह में आता है. इस दिन को विभिन्न भारतीय समुदाय अपने-अपने तरीके से मनाते हैं. विक्रम संवत न केवल एक त्योहार है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की विविधता और समृद्धि का प्रतीक है. यह दिन हमें नई शुरुआत करने और जीवन में नए अध्याय लिखने की प्रेरणा देता है। विक्रम संवत हमें यह भी याद दिलाता है कि समय के साथ बदलाव आवश्यक है और हमें नए अवसरों का स्वागत करना चाहिए.

विक्रम संवत का इतिहास; विक्रम संवत की स्थापना उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने की थी. इसे उन्होंने सकों के आधिपत्य से मुक्ति के उपलक्ष्य में शुरू किया था. विक्रम संवत की गणना ग्रेगोरियन कैलेंडर से लगभग 57 वर्ष आगे है. इस वर्ष विक्रम संवत 2081 का आरंभ हो रहा है.

विक्रम संवत का महत्व

विक्रम संवत का महत्व इसकी गणितीय सटीकता में निहित है।.यह चंद्रमा की गति पर आधारित है और इसके प्रत्येक मास का आरंभ नए चंद्रमा के दर्शन से होता है. इस दिन घरों की सफाई, नए वस्त्रों का धारण, और देवी-देवताओं की पूजा की जाती है. लोग एक-दूसरे को उपहार और शुभकामनाएं देते हैं. विक्रम संवत के दिन विभिन्न समुदाय अपने त्योहार मनाते हैं. सिंधी समुदाय चेटी चंद मनाता है, महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में युगादि, तेलंगाना में उगादि, गोवा और केरल में कोंकणी समुदाय इसे मनाते हैं. कश्मीर में इसे नवरेह कहा जाता है और मणिपुर में सजीबु नोंगमा पानबा. इस दिन घरों को सजाया जाता है, विशेष पकवान बनाए जाते हैं, और देवी-देवताओं की विशेष पूजा की जाती है. यह दिन कृषि समुदाय के लिए भी विशेष है क्योंकि यह नए फसल के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है.

विक्रम संवत के अनुष्ठान; द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 8 अप्रैल, 2024 को रात 11:50 बजे शुरू होकर 9 अप्रैल को शाम 8:30 बजे समाप्त होती है. चैत्र नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त सुबह 6:02 से 10:16 तक है, जबकि कलश स्थापना अभिजीत मुहूर्त 11:57 से 12:48 तक है.