Bhojshala में अखंड सरस्वती पूजन की अनुमति नहीं मिली
दोपहर में नमाज पढ़ने की अनुमति, सुबह और सूर्यास्त तक पूजन किया जा सकेगा
बसंत पंचमी पर धार की भोजशाला में हिंदू पक्ष द्वारा मांगी गई अखंड सरस्वती पूजन आखिर सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी। अदालत ने दोपहर 1 बजे से लेकर 3 बजे तक नमाज पढ़ने की इजाजत दी है जबकि बाकी के समय यानी इस समय को छोड़कर बाकी सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय मे हिंदू पूजन कर सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्ष आपसी सम्मान और सहयोग बनाए रखें। राज्य और जिला प्रशासन से कानून व्यवस्था बनाए रखने को कहा गया है। भोजशाला में 23 जनवरी शुक्रवार को वसंत पंचमी में पूजा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर फैसला सुनाते हुए पूजा और नमाज, दोनों के लिए अलग अलग समय तय कर दिया है और प्रशासन को इसी के हिसाब से इंतजाम करने को कहा है। हिंदू पक्ष ने अखंड पूजा के लिए समय मांगा था। अब ऐसे इंतजाम किए जाने को कहा गया है जिसमें पूजा और नमाज दोनों हो। कितने लोग पूजा करने पहुंचेंगे और कितने नमाज के लिए पहुंचेंगे यह जानकारी लेने का भी निर्देश प्रशासन को दिया गया है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका में कहा गया था कि वसंत पंचमी के दिन केवल हिंदू समाज को भोजशाला में प्रवेश दिया जाए। इससे पहले बसंत पंचमी के शुक्रवार को पड़ने पर एएसआई ही अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी करता रहा था और सक मुताबिक ही 2006, 2013 और 2016 में बसंत पंचमी का पूजन और शुक्रवार की नमाज पढ़ी जाती रही थी। भोजशाला में अब सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं। भोजशाला की छत पर लोहे के बैरिकेड्स और टेंट लगाए गए हैं। परिसर में 300 से ज्यादा और पूरे शहर में 700 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। क्षेत्र में 8 हजार पुलिसकर्मी तैनात हैं। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ के सामने हिंदू फॉर जस्टिस की तरफ से विष्णु शंकर जैन और हरिशंकर जैन ने दलील पेश कीं जबकि बाबा कमाल मौलाना वेलफेयर सोसाइटी की ओर से सलमान खुर्शीद ने तर्क दिए।
क्या है विवाद?
धार की भोजशाला प्राचीन देवी सरस्वती का मंदिर माना जाता है, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यहां मौलाना कमालुद्दीन की मस्जिद है। एएसआई संरक्षित स्मारक है। 18वीं सदी में जब अंग्रेजों ने यहां खुदाई कराई तो यहां से सरस्वती प्रतिमा ही निकली थी जिसे अंग्रेज लंदन ले गए थे और जो आज भी वहां संग्रहालय में मौजूद है। यह परिसर अब एएसआई के संरक्षण में है और आम दिनों मे हिंदू पक्ष को यहां हर मंगलवार को पूजा करने और मुसलमानों को हर शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई है।
