February 12, 2026
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World Postal Day क्यों है विशेष

कम जरुर हुआ डाक का चलन लेकिन आज भी महत्वपूर्ण

प्रतिवर्ष 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस मनाया जाता है, 1969 में यह तय हुआ कि 9 अक्टूबर ‘विश्व डाक दिवस’ बतौर मनाया जाए. डाक का महत्व बताने के लिए शुरु किए गए इस दिवस का आज उतना महत्व भले न रह गया हो लेकिन 9 अक्टूबन 1874 को स्विट्जरलैंड में 22 देशों ने संधि करते हुए ‘यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन’ बनाई थी तब यह बड़े महत्व की चीज थी. भारत इस यूनियन से दो साल बाद यानी 1876 में जुड़ा. इस दिवस का उद्देश्य सभी को डाक सेवाओं के प्रति जागरूक करना और सामंजस्य है.

भारत में 1766 में लॉर्ड क्लाइव ने डाक व्यवस्था की शुरूआत कराई लेकिन विधिवत पहला डाकघर 1774 में वारेन हेस्टिंग्स ने कोलकाता में खुलवाया क्योंकि ईस्ट इंडिया कंपनी का मुख्यालय भी कोलकाता ही था. मुंबई तक जनरल डाकघर पहुंचने में लगभग बीस साल लग गए और 1793 में यह स्थापित किया गया. डाक टिकटों की शुरूआत भारत में 1852 में हुई जबकि 1840 में ब्रिटेन में पहली डाक टिकट जारी हो चुकी थी हालांकि इसका नाम पोस्टल स्टांप न होकर ब्लैक पैनी था क्योंकि इसकी कीमत एक पैनी थी और इसका रंग काला था. तब से अब तक हर देश लाखों टिकट छाप चुका है और इन डाक टिकटों में जो दुर्लभ हो गए हैं उनकी मुंहमांगी कीमत इन्हें सहेजने वाले शौकीन देने को तैयार होते हैं. डाक टिकटों के ऐसे शौकीनों की आज दुनिया भर में कोई कमी नहीं है। अमेरिका के जेम्स रूक्सिन नामक व्यक्ति के पास तो विश्व के प्रथम डाक टिकट से लेकर अब तक के लगभग तमाम दुर्लभ डाक टिकटों का खजाना है. आज नए संचार माध्यमों ने डाक को टक्कर भले दी हो लेकिन आज भी इसकी कद्र की जाती है और कुछ मामलों में तो इन्हीं पर निर्भरता ही कायम भी है.