Pakistan की शांति वार्ता पूरी तरह फेल हुई, वेंस ने कहा दुखद कि बात टूट गई
इजराइल ने कहा कि गालिबाफ और अघराची को वापस ईरान नहीं पहुंचना चाहिए
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही इस्लामाबाद की बातचीत आखिर बेनतीजा खत्म हो गई और दोनों ही पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके। ईरान की तरफ से बीच बीच में यह आधिकारिक संदेश सोशल मीडिया पर आते रहे कि बात में गतिरोध स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से शुरु हुआ और इसके बाद दूसरे विषयों पर भी समझोते की कोई संभावना नहीं रह गई वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रेस कांफ्रेंस करते हुए बताया कि दुनिया को इस समझौते से बहुत उम्मीदें थीं लेकिन आखिर बात नहीं बन सकी और यह दुख की बात हमारे लिए भी है लेकिन ईरान के लिए यह ज्यादा दुख की बात साबित होगी। ईरानी दल काले मास्क के साथ बातचीत के लिए बैठा था और इसके पीछे वजह यह बताई गई कि एक तो वे अपने चेहरे नहीं दिखानान चाहते थे और दूसरा कि वो खोमैनी की मौत का दुख प्रकट करने का ईरानी तरीका अपना रहे थे। इससे पहले अमेरिकी हमलों में मारे गए बच्चों के फोटो कुर्सियों पर रखकर भी अमेरिका को यह बताने की कोशिश की गई कि आपने हत्याएं की हैं। जाहिर है ऐसे माहौल में बात के किसी नतीजे पर पहुंचने की उम्मीद भी नहीं थी लेकिन पूरी दुनिया इस पर फिर भी नजरें गड़ाए बैठी थी। जब अमेरिका की तरफ से कहा गया कि ईरान को होर्मुज खोलना ही होगा तो ईरान ने दो बातें कहीं, पहली यह कि इसका नियंत्रण हमारे पास ही रहेगा और दूसरा यह कि हम इसे पूरी तरह इसलिए भी नहीं खोल सकते क्योंकि यहां युद्ध के दौरान हमने जो बारुदी सुरंगें बिछाई हैं वो घातक साबित हो सकती हैं और हम इन्हें हटाना भी चाहें तो महीनों लग जाएंगे। अब यदि ईरान के लोगों का आईक्यू विश्व में चौथे नंबर के सबसे तेज दिमाग वालों जैसा है तो वो अपनी पूरी बुद्धि इस बात पर लगा रहे हैं कि कैसे अमेरिका से अपनी सारी शर्तें मनवाई जाएं वहीं दुनिया में आईक्यू स्तर पर अठाहरवें नंबर पर आने वाले अमेरिका की कोशिश यह रही कि जैसे भी हो ईरान दो तीन बड़ी अमेरिकी शर्तें मान ले तो वो जीत घोषित करते हुए मामले को खत्म करें। ईरान ऐसा होने नहीं देना चाहता था और आखिर वही हुआ जो ईरान चाहता था। इस बीच इजराइल ने दो तीन ट्वीट किए हैं जिनमें यह भी कहा गया है कि जो डेलिगेशन पाकिस्तान पहुंचा है उसे वापस ईरान नहीं पहुंचना चाहिए। वेंस ने तो बिना नतीजे के ही वापस अमेरिका लौटने की घोषणा कर दी है लेकिन इस वार्ता की विफलता के बाद अमेरिका और इजराइल कोर्स ऑफ एक्शन क्या तय करते हैं इस पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
