February 18, 2026
Business Trends

Great Nicobar प्रोजेक्ट को पर्यावरण की मंजूरी

भारत के समुद्री व्यापार और सैन्य अहमियत के चलते गेहद अहम है यह प्रोजेक्ट

ग्रेट निकोबार परियोजना को पर्यावरण संबंधी मंजूरी आखिर मिल ही गई। यह वही प्रोजेक्ट है जिसे देश के सबसे बड़े इंफ्रा प्रोजेक्ट के तौर पर सामने रखा गया है और 92,000 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट को लेकर सोनिया गांधी खासतौर पर विरोध में काफी कुछ कह और लिख चुकी हैं। सैन्य रणनीति, सुरक्षा और व्यापार के हिसाब से ग्रेट निकोबार काफी बड़ा प्रोजेक्ट है और यह 2040 की समयसीमा के साथ लाया गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इसे मंजूरी देते हुए इसे सामरिक दृष्टि से महत्व का बताया है, एनजीटी ने पर्यावरण का अधिकतम ध्यान रखते हुए प्रोजेक्ट पूरा करने की शर्त लगाई है। यह प्रोजेक्ट इसलिए महत्व का है क्योंकि मलक्का समुद्री रास्ता से दुनिया का लगभग चालीस प्रतिशत समुद्री व्यापार होता है। इंग्लिश चैनल के बाद सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग से जापान, चीन, दक्षिण कोरिया और पश्चिम एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया से यूरोप तक शिप निकलते हैं और इसे हिन्द महासागर का ‘चोक प्वांइट पॉलिटिक्स’ कहा जाता है। यहां कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट और 450 मेगावॉट का पॉवर प्लांटबनाने के साथ एक विशाल टाउनशिप भी बनाई जाएगी। ग्रेट निकोबार पोर्ट को चीन ने श्रीलंका के हंबनटोटा, म्यांमार के क्यौकफ्यू और पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाहों जैसे निवेशों के काउंटर की तरह माना जा रहा है। चार चरणों में आकार लेने वाले इस प्रोजेक्ट का पहला चरण 2028 तक पूरा होगा, जो 40 लाख कंटेनर की क्षमता का होगा। 2058 तक ये बंदरगाह 1.6 करोड़ कंटेनर तक संभालने के काबिल हो जाएगा। सोनिया गांधी ने इस प्रोजेक्ट से पर्यावरण की क्षति बताते हुए एक लेख लिखा जो कई जगह छापा गया, इसके बाद कांग्रेस ने हर स्तर पर इस प्रोजेक्ट का विरोध किया है।