Priyanka के भड़काने पर कांग्रेस सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को गालियां दीं- किरन रिजिजू
लोकसभा अध्यक्ष के कक्ष में कांग्रेस के सांसदों ने बिरला को गालियां दीं और वेणुगोपाल के साथ प्रियंका सांसदों को भड़काती रहीं
विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव लाने के तुरंत बाद लोकसभा अध्यक्ष ने यह तय कर लिया कि वे इस पर फैसला होने तक अध्यक्षीय कामों से दूर रहेंगे लेकिन इसके पीछे वजह सिर्फ इतनी नहीं है बल्कि हकीकत यह है कि कांग्रेस सांसदों ने जिस तरह उनके चेंबर में बिरला से बदतमीजी की उसके बाद उन्होंने यह फैसला लिया है। खुद संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने यह बात कही है और बताया है कि कांग्रेस के कई (बीस से ज्यादा)सांसद स्पीकर के कक्ष में गए थे जहां आमे बिरला के साथ गाली गलौज की गई। रिजिजू ने इसके आगे और भी भयावह खुलासा करते हुए कहा है कि प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल वहां मौजूद थे और उन्होंने अपने सांसदों को ऐसा करने से रोकने के बजाए उकसाने का काम किया। रिजिजू ने कहा कि इस घटना से स्पीकर बेहद आहत हैं। कांग्रेस सांसदों के स्पीकर के कक्ष में पहुंचकर उनसे गाली गलौज की बात बेहद खतरनाक संकेत है क्योंकि इससे पहले प्रधानमंत्री को संसद में घेरने की रणनीति बनाने का आरोप बिरला ने ही लगाया था जिसके चलते विपक्ष की एक बड़ी रणनीति ध्वस्त हो गई थी और मोदी ने धन्यवाद प्रस्ताव पर भाषण देना ही मुल्तवी कर दिया था। कांग्रेस सांसद इस बात से बिरला से नाराज हैं कि आखिर उन्होंने मोदी को संसद में महिला सांसदों द्वारा घेरने की साजिश को नाकाम क्यों कर दिया। इसी के चलते उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया गया और अब यह नई जानकारी सामने आ रही है कि कांग्रेस सांसदों ने स्पीकर के कक्ष में उनके साथ गाली गलौज तक कर डाली और वह भी प्रियंका व वेणुगोपाल की मौजूदगी में। रिजिजू ने कहा कि वो तो अध्यक्ष का स्वभाव काफी शांत है वरना राहुल द्वारा बार बार बिना अनुमति बोलने की कोशिश और कांग्रेस सांसदों द्वारा किए गए बुरे व्यवहार के बदले इन पर कड़ी कार्रवाई हो सकती थी। कांग्रेस सांसदों का ऐसा व्यवहार और प्रियंका गांधी का उनको उकसाना कोई मामूली बात नहीं मानी जा सकती है। अब बताया जा रहा है कि अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर चर्चा बजट 9 मार्च को हो सकती है और कम से कम तब तक तो ओम बिरला अध्यक्षीय काम नहीं संभालना चाहते हैं जबकि सत्ता पक्ष उन्हें इस बात के लिए मनाने में लगा है कि जब ऐसा कोई नियम ही नहीं है कि अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव हो तो वो कार्य संपादित नहीं कर सकते तो बिरला को अपना दायित्व निभाना चाहिए।
हद यह भी है कि जिस अविश्वास प्रस्ताव को लेकर विपक्ष ने हंगामा खड़ा कर रखा है उसमें इतनी गंभीर त्रुटियां हैं कि यह स्वीकार्य ही नहीं है क्योंकि बताया गया है कि 2 फरवरी 2025 को राहुल गांधी को भाषण पूरा नहीं करने दिया गया लेकिन इस तारीख पर ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था। दरअसल विपक्ष ने चार जगह 2026 की जगह 2025 का जिक्र किया है जिसके चलते यह अविश्वास प्रस्ताव हास्यास्पद हो गया है।
