Epstein की आत्महत्या की खबर कहीं झूठ तो नहीं थी
एपस्टीन की कथित आत्महत्या को लेकर कई सवाल अब भी अनसुलझे ही हैं
एपस्टीन फाइलों ने दुनिया भर में तहलका मचा रखा है और अगस्त 2019 में मृत घोषित किए जा चुके इस आदमी की फाइलें खुलने से बड़े और रसूखदार कहे जाने वाले कई सारे लोगों की जिंदगी में भूचाल आ गया है। फाइल्स से कहानियां अभी निकल ही रही हैं और इसी बीच न्यूयॉर्क जेल की एक और फाइल खुल गई है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि एपस्टीन की मौत की खबर ही झूठी हो और वह अब भी जिंदा हो। अब तक तो यही बताया गया है कि दस अगस्त 2019 की सुबह जब जेल के वार्डन ने देखा कि जेफ्री एपस्टीन कोई जवाब नहीं दे रहा है और उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाया गया तो पता चला कि वह तो मर चुका है, मरने की वजह आत्महत्या बताई गई। अमेरिकी जेलों के कायदे इतने सख्त हैं कि वहां यूं ही किसी कैदी की आत्महत्या समझ से परे है और फिर यदि कैदी जेफ्री एपस्टीन जैसा हाइप्रोफाइल व्यक्ति हो जो अमेरिका ही नहीं दुनिया की सबसे बड़ी ताकत मानी जाने वाली ताकतों को मेजबान होने के साथ अंतरंग मित्र और ‘पार्टनर इन क्राइम’ भी रहा हो। पहली शंका तो यहीं से उठती है कि आखिर जिस कैदी को हर आधे घंटे में चेक करना बाहर के पहरेदारों की जिम्मेदारी रही हो उसकी रात साढ़े दस से लेकर सुबह छह बजे बाद तक किसी ने सुध क्यों नहीं ली आखिर क्या वजह थी। आधे घंटे की जगह आठ घंटे तक निगरानी से बाहर? यह भी शंका की पहली ही कड़ी है, जब उसकी कथित मौत के पहले के सौ घंटों का हिसाब लगाया गया तो पता चला कि न जाने कितनी ऐसी गड़बड़ियां देखी गईं जो आम नहीं हो सकतीं। एपस्टीन ने अपनी मौत से पहले वाली शाम को एक फोन करने की अनुमति ली जो जेल नियमों के मुताबिक दे भी दी गई लेकिन यह कॉल भी साधारण नहीं था क्योंकि उसने अपनी मां से बात करने की अनुमति मांगी थी और जेल वालों ने यह तक जानने की कोशिश नहीं की कि क्या वाकई वह अपनी मां से बात कर रहा है, हकीकत यह थी कि एपस्टीन की मां को मरे एक दशक से भी ज्यादा समय हो गया था और यह कॉल जो उसने अपनी मां के नाम पर किया वह दरअसल बेलारुस में अपनी किसी प्रेमिका को किया गया था। जाहिर है यदि जेल मैन्युअल के मुताबिक इस बात की तहकीकात की गई होती तो एपस्टीन का झूठ पहले ही पकड़ा जाता और नहीं भी तो जेलर को यह तो पता चल ही जाता कि वह अपनी संपत्तियों वगैरह को लेकर संकेतों में कुछ खास निर्देश दे रहा था, इसके अलावा वह बड़ी सामान्य सी बातें कर रहा है जैसे उसकी कोठरी की गंदगी वगैरह के बारे में, क्या आत्महत्या की तरफ बढ़ रहा व्यक्ति अपनी जेल की बैरक की गंदगी की बात करने के लिए फोन करेगा? दरअसल इस कथित मौत से पहले जेल की व्यवस्थाओं में हुए बदलाव, कैमरों का बंद होना (सिर्फ एक कैमरा चालू मिला) और रहस्यमय फोन के अलावा भी एक बड़ी वजह है जो एपस्टीन के जेल से भगा दिए जाने की थ्योरी को मजबूत करती है और वह है एपस्टीन का महज दो दिन पहले अपनी वसीयत और हिसाब किताब में बदलाव की कानूनी तैयारी करना। 577 मिलियन डॉलर के कैश के अलावा उसकी अमेरिका में फैली तमाम संपत्तियों को लेकर उसने अगस्त के शुरुआताी दिनों में ही महत्वपूर्ण बदलाव करा दिए थे और बाकायदा अटॉर्नी की निगरानी में किए गए ये बदलाव कुछ इस प्रकृति के थे कि यदि वह गायब हो जाता है तो संपत्तियों पर उसका अदृश्य नियंत्रण बना रहे। वसीयत में दर्ज लाभार्थियों को संपत्ति कभी सीधे नहीं मिली। एपस्टीन की संपत्ति बाद में एक ट्रस्ट में डाली गई, जिसका उपयोग पीड़ितों को मुआवजा देने और कानूनी खर्चों को पूरा करने में किया जाना तय था लेकिन क्या वाकई ऐसा ही हुआ? इस वसीयत के अचानक बदलाव को संपत्ति बचाने की रणनीति भी माना जा सकता है और यह भी कि एपस्टीन के पास भागने का कोई फूलप्रूफ प्लान था जिसे अंजाम देने से पहले यह कार्रवाई जरुरी थी। इतनी बड़ी संपत्ति का अचानक पुनर्वितरण इस बात का बड़ा सबूत माना जाता है कि एपस्टीन को “गायब” किया गया।एपस्टीन की मौत के समय जेल में कई सुरक्षा खामियां सामने आईं जिन्हें बाद में स्वीकार किया गया कि ये अक्षम्य गलतियां थीं जैसे कि उसके पास कैदियों को दिए जाने वाले चादर कंबल भी जरुरत से ज्यादा थे और इन्हीं में से किसी से उसने उसने कथित तौर पर फंदा बनाया। यह भी कि एपस्टीन के साथ एक और कैदी को रखा जाता था लेकिन नौ और दस अगस्त की रात ही वह साथी कैदी वहां नहीं था बल्कि उसे दूसरी जगह शिफ्ट किया गया था और एपस्टीन के पास किसी दूसरे कैदी को नहीं भेजा गया था। अब आप कई कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कीजिए। दुनिया के सबसे पॉवरफुल लोगों के रहस्य जिस व्यक्ति के पास हों, जो अरबों रुपए की संपत्ति रखता हो और अमेरिकी राष्ट्रपतियों से लेकर बिल गेट्स जैसे अरबपति जिसके निजी द्वीप पर जाना शान समझते हों, वह जब कैद में होता है तो उस पर कोर्ट के आदेश के बाद भी निगरानी नहीं रखी जाती। वह कथित मौत से दो दिन पहले अपनी वसीयत के सारे कागजात बदल देता है, जो मौत से पहले की शाम अपनी मां को फोन करने के बहाने किसी को लगभग 15 मिनट कॉल करते कुछ समझाता हो, जिसकी कैद के बाहर तमाम कैमरे उस रात बंद हो जाते हों (सिर्फ एक कैमरा ही काम कर रहा होता है), उससे महज पंद्रह फीट की दूरी पर मौजूद लोगों को किसी के कराहने तक की आवाज सुनाई नहीं देती और न जान बचाने के संघर्ष के कोई निशान उसकी कोठरी में मिलते हैं, गार्ड सोए भी नहीं थे बल्कि गाड़ियों वगैरह को लेकर आपस में सामान्य बात करने में ही मशगूल थे लेकिन उन्हें पड़ोस की कोठरी में मरते व्यक्ति की कोई आवाज तक नहीं आती खासतौर पर तब जबकि यह साइलेंट हार्टअटैक जैसा मामला न होकर आत्महत्या का मामला बताया गया। इसके बाद संशय तब बढ़ जाता है जब कथित लाश को लेकर कुछ लोग दावा कर देते हैं कि झूठी मौत दिखाने के लिए ‘बॉडी डबल’ का प्रयोग किया गया क्योंकि शव पर मौजूद निशान एपस्टीन से मेल नहीं खाते। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं जिनमें एपस्टीन जैसा कोई व्यक्ति दिखाई देता है। अमेरिकी सरकार बार बार, लगातार दावा करती रही है कि एपस्टीन की मौत हो चुकी है और उसने आत्महत्या कर ली थी लेकिन ऐसे कई तथ्य हैं जो कहते हैं कि एपस्टीन के जीवित होने की संभावनाओं से पूरी तरह इंकार नहीं किया जा सकता। जिस तरह से अब खुलासे हो रहे हैं और जितने बड़े चेहरे एपस्टीन की बनाई फाइल्स से बेनकाब हो रहे हैं उसमें षड्यंत्र वाली थ्योरी खारिज नहीं की जा सकती। उसके दोस्त इतने प्रभावी लोग रहे कि उसे जेल से सुरक्षित निकलवा देना कोई बड़ी बात तो थी नहीं और शायद यही वजह है कि कई सारे लूपहोल वाली उसकी आत्महत्या वाली बात पर शंका करने वालों की कमी नहीं है। सोशल मीडिया पर आज भी वो तस्वीरें दौड़ रही हैं जिनमें एपस्टीन कथित तौर पर बाहर घूमता नजर आता है… ठीक वैसे ही जैसे एक मृत शरीर को 2019 में अमेरिकी सरकार ने कथित तौर पर एपस्टीन की लाश बताया था।
