Unesco ने माना दीपावली को सांस्कृतिक धरोहर
यूनेस्को की सूची में दीपावली शामिल: भारत के लिए ऐतिहासिक सांस्कृतिक उपलब्धि
भारत के सबसे लोकप्रिय और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध त्योहारों में से एक, दीपावली, को यूनेस्को की इंटैन्जिबल कल्चरल हेरिटेज ऑफ ह्यूमैनिटी (अमूर्त सांस्कृतिक विरासत) की प्रतिनिधि सूची में शामिल कर लिया गया है। यह निर्णय बुधवार को दिल्ली के लाल किले में आयोजित यूनेस्को की 20वीं अंतर-सरकारी समिति की बैठक के दौरान लिया गया, जिसे भारत पहली बार होस्ट कर रहा है। यूनेस्को ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया संदेश में इसकी घोषणा की। इस घोषणा के साथ ही लाल किले के प्रांगण में मौजूद कलाकारों, प्रतिनिधियों और दर्शकों के बीच उत्साह की लहर दौड़ गई। मंच के सामने पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों ने विभिन्न भारतीय नृत्य शैलियों की प्रस्तुति दी, जबकि विशाल स्क्रीन पर दीपावली के दृश्य प्रदर्शित किए गए। दीपावली अब उन 16 भारतीय परंपराओं में शामिल हो गई है जिन्हें यूनेस्को की इस प्रतिष्ठित सूची में स्थान मिला है। इससे पहले योग, दुर्गा पूजा, कुंभ मेला, वेदपाठ की परंपरा, गरबा और रामलीला जैसी सांस्कृतिक परंपराएँ इस सूची में शामिल हो चुकी हैं।
यूनेस्को की यह सूची उन सांस्कृतिक परंपराओं को मान्यता देती है जो किसी समाज की पहचान, सामूहिक स्मृति और सांस्कृतिक निरंतरता का आधार होती हैं। दीपावली का चयन इस बात का प्रमाण है कि यह त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय समाज की विविधता, सह-अस्तित्व और उत्सवधर्मिता का जीवंत प्रतीक है। बैठक के दौरान 79 देशों से आए प्रतिनिधियों ने 67 नामांकनों पर विचार किया, जिनमें भारत की ओर से दीपावली भी शामिल थी। चर्चा के बाद समिति ने सर्वसम्मति से दीपावली को सूची में शामिल करने का निर्णय लिया। घोषणा होते ही लाल किले के प्रांगण में ‘जय हिंद’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे गूंज उठे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि का स्वागत करते हुए कहा कि दीपावली का यह वैश्विक सम्मान भारत की सांस्कृतिक आत्मा और उसकी कालातीत परंपराओं का उत्सव है। उन्होंने कहा कि यह मान्यता दुनिया भर में दीपावली की लोकप्रियता को और बढ़ाएगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मान्यता
दीपावली का यूनेस्को सूची में शामिल होना कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
– यह भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूत करता है।
– त्योहार की वैश्विक पहचान और संरक्षण को संस्थागत समर्थन मिलता है।
– यह भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए गर्व का क्षण है, जो दुनिया भर में दीपावली को सांस्कृतिक पुल की तरह मनाता है।
– इससे भारत की अन्य सांस्कृतिक परंपराओं के लिए भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर नए अवसर खुलते हैं।
अगला कदम: छठ पूजा की उम्मीद
भारत ने अगले वर्ष के चक्र के लिए बिहार की छठ पूजा का नामांकन भी भेजा है, जिस पर समिति आगामी सत्र में विचार करेगी। यदि यह भी सूची में शामिल होती है, तो भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर और मजबूती मिलेगी।
