Pakistan Delegation से उम्मीद कि उधार ही माँग लाएँ
मनजी की कलम से … सरहद पार से नवा ताज़ा ख़बरों का पुलंदा लाए है जनाब म्या मीर मुंशी जी-
हिन्दुस्थान ने जब अपने तमाम पार्टी के नुमाइंदे दुनिया में भेजने का फ़ैसला और एलान किया तब रियासत के वज़ीर ए आज़म ने भी एक अहम फ़ैसला लिया. खित्ते से कुछ ऐसे दानिशमंद और हुनरमंद शहरियों को चुना जो अंग्रेज़ी बोलने में अव्वल हो. चुनांचे इस डेलीगेशन का मुखिया वज़ीर ए आज़म ने बेनज़ीर बीवी के लख्ते जिगर बिलावल भुट्टो को चुना.
जनाब क़िबला बिलावल जिन्हें क़ौम के कुछ कट्टर लीडरान क़िस्मत वाला नुथफ़ा भी कहते है, कुछ उन्हें मीठा नचनिया कहते है, ने ट्वीट कर बतलाया कि किस तरह से वज़ीर ए आज़म ने उनके टैलेंट से ख़ुश हो उन्हें इस इज़्ज़त से नवाज़ा है. जनाब भुट्टो ने फ़रमाया कि वे अपनी अंग्रेज़ीयत भरी जबान से दुनिया को बतलाएँगे कि हिन्द कितना ज़ालिम मुलुक है!
इस डेलीगेशन में जाने वाली कुछ अहम मोहतरमाएँ है- बेगम हिना रब्बानी खार, सेनेटर् शेरी रहमान , मोहतरमा तहमीना जंजुआ, और इन ढलती हुस्न वाली हसीनाओं के साथ कुछ खूसट बुढ़ऊ लोग भी जायेंगे , पाठकों को इन बुढ़ऊ लोगों के नाम जानने में कोई दिलचस्पी नहीं है.
ये डेलीगेशन लंदन फ्रांस, वाशिंगटन, ब्रुसेल्स आदि का दौरा करेंगे और वहाँ जाकर अंग्रेज़ी में तक़रीरें देंगे कि किस तरह से हिन्द ने अचानक हमला बोला. क़ौम इस डेलीगेशन से ये भी आस बाँधे बैठी है कि शायद ये लोग कुछ और उधार इन जगहों से माँग लाएँ.
इस मुद्दे और मसले पे गुफ़्तगू करती हुई बुड्डो शेरी रहमान ने बजा फ़रमाया- फ़ौजी फ़तह के बाद हम इस डिप्लोमेसी में भी फ़तह हासिल करेंगे, इंशा अल्लाह. शेरी रहमान ने ये भी फ़रमाया कि हालाँकि हिन्द की तरफ़ से उनका आशिक़ ए इमाम , मर्दे मुजाहिद , चच्चा का असली वारिस म्या थरूर भी तशरीफ़ ला रहे है, और वो ख़ुद पर्सनली उनसे दो दो हाथ करना चाहेंगी. शेरी रहमान जी जवानी में भी अव्वल दर्जे की कुश्ती एक्सपर्ट थी और आज भी अच्छे अच्छे पहलवान उनके सामने पानी माँगते है.
पानी से याद आया- शेरी रहमान जी ने आगे फ़रमाया- हिन्दुस्थान को समझना होगा कि नदियों का पानी किसी टंकी की तरह नहीं है कि जब मन चाहा रोक दिया. मोहतरमा ने कहा- हम दो हफ्तों के इस टूर पे वाटर ट्रीटी पर भी सवाल खड़े करेंगे और हिंदुस्थान से पानी लेके मानेंगे!
जंग के बाद इस डिप्लोमेसी की जंग में कौन जीतेगा, जानने के लिए जुड़े रहिए !
बुड्डो शेरी के अरमानों को देख थरूर जी के शागिर्द ने फरमाया-
इश्क़-बाज़ी बुल-हवस बाज़ी न जान
इश्क़ है ये ख़ाना-ए-ख़ाला नहीं!
